सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Chori kisne ki -चोरी किसने की


       Chori kisne ki   शिगोल नाम का  बहोत ही प्रसिद्ध शहर था और वहा शहर के सबसे बेहतरीन लुटेरे रहते थे। पुरे देश में ज़्यादातर चोरो का ही वास था आप ऐसा कह सकते हो की वो चोरो की दुनिया थी। कुछ लोग चोरी करके पकडे जाते पर शहर में ४ चोर अजय विनय विजय प्रकाश ऐसे थे जिनको आज तक कोई भी पकड़ नहीं पाया था हर बार वो किसी न किसी तरह बच जाते शहर की पोलिस इन ४ लोगो को कभी पकड़ नहीं पायी समय बितता गया पोलिस के ट्रान्सफर होते रहे और शहर में चोरी के केस भी बढ़ ने लगे। 

Chori kisne ki


        चारो चोरो को अलग अलग बीमारी थी अजय को भूल ने की बिमारी थी ५ घंटे से ज़्यादा वो कुछ भी यद् नहीं रख सकता था विनय को रात में अच्छे से दिखाई नहीं देता विजय को ज़्यादा सुनाई नहीं देता था और प्रकाश को साँस लेने में तकलीफ होती। उनका स्वाथ्य ठीक ना होने के बावजूद वो शहर के सबसे बेहतरीन चोरो में से एक थे। शिगोल शहर अब चोरी के मामले में पुरे विश्व में प्रसिद्ध होता जा रहा था पर उनकी ये चोरी ज़्यादा देर तक नहीं चलने वाली थी क्युकी शहर में अब चोरी रोक ने की सारी ज़िम्मेदारी जय नाम के पुलिस अफसर ने ले ली थी। जय ने बहोत सारे चोर को पकड़ा वो भी पुरे सबूत के साथ जय के आने के बाद अब शहर में चोरी के मामले कम होते जा रहे थे। जय काफी बुद्धिमान और चालाक था पर अभी तक जय का पाला उन ४ चोर से नहीं पड़ा था। जय के कारनामे के चर्चे पुरे शहर में होने लगे। और उन ४ चोरो को भी जय की शक्ति का परिचय हो गया था की वो क्या कर सकता हे पर उन चोरो ने इतने सालो में इतनी चोरिया की थी की उन तक पोहचना लगभग नामुमकिन था। पैसो के ज़रिये वो किसी को भी अपने साथ कर सकते थे। उनके पास अब इतने पैसे थे की चोरी करने की अब उन्हें कोइ ज़रूरत भी नहीं थी। जय के होते हुवे शहर में जितने भी चोर थे उन सब को उसने सजा दिलाई कुछ साल तक शहर में एक भी चोरी का केस माहि आया जय ने सोचा अब ये शहर पूरी तरह चोरी से मुक्त हो गया हे पर शायद ये समझना उसकी भूल थी। 

        अजय विनय विजय और प्रकाश ने २ साल बाद फिर से शहर में चोरी करने की शरुवात कर दी इतने साल बाद वो चोरी करने के लिये आये तो उनकी इच्छा थी की इस बार कोई बड़ी चोरी करेंगे। जय के होते हुवे शहर में चोरी अब नामुमकिन थी इस लिए एक बार शहर के म्यूज़ियम में १५० करोड़ का हिरा २ दिन के लिये आता हे और इसकी संभाल ने की ज़िम्मेदारी जय को मिली क्युकी उससे काबिल पुलिस अफसर पुरे शहर में नहीं था। सारा शहर म्युज़ियम में इस हिरे को देख ने जाते हे। और दूसरी और चोरो को इस बात की पता चलते ही उसे चोरी करने का निर्णय लिया। प्रकाश ने  कहा ये हमारी आखरी चोरी होगी इसके बाद हम कभी भी चोरी नहीं करेंगे। सब प्रकाश की बात से सहमत हो गये प्रकाश ने कहा चोरी हम आज नहीं कल करेंगे और एक विजय ने एक योजना बनायीं जिस जगह म्युज़ियम था उसने उसके नज़दीक ही एक होटल में रूम ले लिया और ऐसा रूम लिया जहा से म्युज़ियम बिलकुल साफ दिखाई दे। 

          चोरो ने जो प्लान बनाया ऐसा कुछ हुवा नहीं जिस दिन वो चोरी करने वाले थे उसके आगे के दिन ही म्युज़िअम में चोरी हो जाती हे जब म्यूज़ियम में चोरी होने की बात चोरो को मालूम पड़ती हे तो चारो चोरो एक दूसरे पे इलज़ाम लगाने लगते हे। होटल के रूम से ज़ोर ज़ोर से चोरो का आवाज़ बहार जा रहा था सब एक दूसरे पर इलज़ाम लगा रमे थे। चोरो के रूम के बहार एक वैटर आता हे और वो सारी बात सुन लेता हे और तुंरत ही पुलिस को फ़ोन कर देता हे। पुलिस ने चारो चोरो को गिरफ्तार कर लिया। और उनसे पुलिस स्टेशन में पूछताछ चालू की पर सब एक ही जवाब दे रहे थे की मेने चोरी नहीं की। इस लिए जय ने चारो को अलग रूम में ले जाके पूछ परछ की और जय को उनकी बीमारिया के बारे में पता चलता हे। 

           प्रकाश ने कहा हम चोरी करने वाले थे पर आज नहीं कल अजय ने कहा की चोरी का प्लान मुझे चोरी के १ घंटे पहले ही बताते हे क्युकी ५ घंटे में सब भूल जाता हु इस लिए चोरी मेने नहीं की विनय ने कहा चोरी अंधरे में हुवी हे और अँधेरे में मुझे दिखाई नहीं देता इस लिए चोरी मेने नहीं की। और विजय ने कहा सिक्योरिटी अलारम या कोई भी आवाज़ मुझे सुनाई नहीं देती इस लिए में अकेले चोरी नहीं कर सकता। चारो की बात सुनकर जय तुरंत समज जाता हे की Chori kisne ki हे चोरी किसी और ने नहीं पर प्रकाश ने की थी उसने चोरी करने का plan कल इस लिए बनाया क्युकी आज चोरी करके वो फरार हो जाये।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

bhoot ko hua pyar - भूत को हुआ प्यार

       एक बार की कहानी हे कंडल नाम के शहर में विजय नाम का एक आदमी रहता था। वो अकेला ही रहता था उसके परिवार या सगा सबंधीयो में कोई नहीं था। विजय ने कभी शादी भी नहीं की क्युकी उसे अब अकेले रह ने की ही आदत हो गयी थी। बचपन से ही उसे न माता पिता का प्यार मिला न भाई बहन का           एक दिन जब वो कुछ सब्जी लेने के लिए बहार जाता हे सब्जी लेकर घर ही जा रहा था और रास्ते में एक कार से उसको टक्कर लग जाती हे और वो बहोत दूर जाके पड़ता हे। वो सड़क पर खून से लत पत्त पड़ा रहा पर बहोत समय तक उसे कोई बचाने नहीं आया। सब लोग ने बस भीड़ जमा कर के रखी थी कोई फ़ोन में वीडियो उतार रहा था तो कोई खड़े खड़े तमाशा देख रहे थे। सब विजय को गेहर के खड़े हो गये। और तभी वहा प्रिया नाम की एक लड़की विजय को मदद करने के लिए आगे आती हे। उसने तुरंत एम्बुलेंस को फ़ोन किया। एम्बुलेंस को आयी की तुंरत ही विजय के साथ एम्बुलेंस में बैठ गयी विजय के शरीर में से काफी खून बह रहा था। इस लिए प्रिया ने अपने दुपट्टा का थोड़ा कटका फाड़ के विजय का खून रोक ने का प्रयास कर रही थी। पर विजय का...

Bhavishy se daro mat -भविष्य से डरो मत

        जैसे जैसे टेक्नोलॉजी में परिवर्तन आता हे वैसे ही समय के साथ इंसान के व्यवहार में भी १ चीज़ आने लगती  हे और वो हे डर आज डर किसी भी इंसान में सामन्य माना जाता हे मतलब हर कोई किसी न किसी चीज़ से डरता हे पर १ बार आप ही सोच के देखो की ये दर क्या हे और उसकी शरुवात कहा से हुवी इंसान कितना भी क़ामयाब क्यों न हो जाये पर अगर उसके अंदर किसी बात का डर छुपा हे तब कामियाब होते हुवे भी वो इंसान हमेशा दुखी होता हे।                कोई इंसान को डर रहता हे की भविष्य में उस से कोई आगे नहीं निकल जाये माता पिता को उसके संतान को कुछ हो न जाये उनकी सुरक्षा से जुड़ा डर रहता हे किसी को अपने भविष्य के बारे में चिंता होती हे आसान भाषा में बात करे तो डर कभी भी हकीकत में नहीं होता वो हमेशा भविष्य में होता हे और भविष्य तो अनिश्चित हे हमारी मृत्यु हमारी हाथ में नहीं हे हम भविष्य देख भी नहीं सकते फिर क्यों भविष्य के डर के बारे में हम वर्तमान में सोचते हे। आपको जान कर शायद हैरानगी होगी की किसी डर या चिंता को बार बार रोज़ सोच ने से इंस...

bhakt aur bhagwan ki katha -भक्त और भगवान की कथा ।

                 आज की कहानी १ भक्त और भगवान की हे मंडल नाम का एक गाँव था। वहा गोविंद और गुणी नाम के १ दम्पति रेहते थे। वो भगवान श्री कृष्णा के बहोत बड़े भक्त थे संध्या के समय हर रोज़ गोविंद नदी के तट पर जाता और भगवान का ध्यान धरता। गोविंद की पत्नि स्वभाव में बिलकुल उसके जैसा था और उनकी पत्नी का नाम गुणी था। वो अपने पति को ही भगवान मान कर उनकी हर बात मानती और भगवान की सेवा पूजा में भी अपने पति की मदद करती उनसे मिल कर ऐसा लगता जानो कृष्णा भक्त मीरा और श्री राम पत्नी सीता दोनों के ही गुण बराबर मात्रा में थे।              गोविंद कुछ भी काम धंधा नहीं करता था उसने अपना पूरा जीवन भगवान के भरोसे ही छोड़ दिया था गुणी घर में ही भगवान के लिए खिलोने बनाती और बहोत ही कम किम्मत में दुसरो को दे देती। घर में पैसे की बचत करना असंभव जैसा था। गुणी हमेशा अपने पति से कहती की भगवान हर बार तो हमारी मदद कर ने नहीं आ सकते। पर गोविंद एक ही बात बोलता जब इतने साल तक भगवान ने मुझे कोई भी कस्ट नहीं दिया हे तो आगे भी...