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Pachtawa - पछतावा

                  राकेश नाम का आदमी था। जीवन में वो हर किसी की तरह बहोत बड़ा आदमी बनना चाहता था, पर वो उसके लिए मेहनत नहीं करना चाहता था बस दिन भर बैठ कर बड़े बड़े सपने देखता रहता था उसके घर वाले भी कही बार उसे डाटते और कहते की सिर्फ सपने देख ने से वो हकीकत नहीं बन जाता उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है। पर राकेश को लगता था की बिना कुछ करे ही एक दिन वो बड़ा आदमी बन जायेगा। पर उसकी ये सोच गलत साबित होती है चलिए देखते है कैसे।

                  राकेश  के माता पिता बूढ़े हो चुके थे अब घर में पैसो की कमी आ गयी थी,बहन की शादी भी नहीं हुवी थी क्युकी अब उनके पास उतने पैसे ही बचे नहीं थे की वो घर में कोई बड़ा प्रसंग भी मना सके। राकेश के पिता की नौकरी भी छूट गयी थी यानि घर की इनकम अब ज़ीरो हो चुकी थी। राकेश की माता सिलाई का काम तो करती थी पर उतने पैसो से बहन की शादी तो दूर घर के खर्च में ही पैसे चले जाते थे। घर में सब चिंता में थे के पैसे कहा से लाये अब पर राकेश को इस बात की कोई चिंता नहीं थी। राकेश ने घर वालो को ऐसा दिलासा दिया की में अभी बहार जाके लॉटरी की टिकट लेके आता हु। बाद में थोड़े ही दिनों में हम पैसे वाले बन जायेगे। राकेश के पिता ने कहा की अगर वो लॉटरी ना लगी तो ? राकेश ने कहा ऐसा नहीं होगा में एक साथ ही २० लॉटरी खरीद लूंगा। और मुझे विश्वास हे की उन २० में से १ लॉटरी हमारी लगेगी। राकेश पुरे ५००० की लॉटरी लेके घर गया। घर में राकेश के पिता के कुछ दोस्त आये थे। उन्हें राकेश के घर की हालत मालूम थी इस लिए वो राकेश के लिये जॉब का प्रस्ताव ले के आये थे। पर राकेश ने सैलरी और कुछ भी जाने बिना ही जॉब के लिये मना कर दिया और कहा की हमें कोई जॉब की ज़रूरत नहीं हे अब हम थोड़े ही दिन में करोड़पति बन ने वाले हे राकेश के पिता ने कहा एक बार उनकी बात तो सुन लो पर राकेश कोई बात सुनना नहीं चाहता था। 

                  थोड़े दिन बाद लॉटरी का रिजल्ट आने वाला था इन दिनों में राकेश आये दिन भगवान के मंदिर में चक्कर लगाया करता था। थोड़े दिन बाद लॉटरी का रिजल्ट आया और राकेश की इंतज़ार की घड़ी भी ख़तम हुवी और साथो साथ भगवान के मंदिर में जाना भी बंध हो गया। लक्की लॉटरी का नंबर 564349790 था। राकेश उसकी २० लॉटरी में ये नंबर ढूढ़ने लगा। १ के बाद १ सारी लॉटरी के नंबर उसने देख लिये और आखिर में २० वी लॉटरी का नंबर 564349791 निकलता हे। आगे के नंबर देख कर तो राकेश बहोत खुश हो गया पर पीछे ज़ीरो की जगह १ देख कर वो दुखी हो जाता हे। घर वालो ने बचत कर कर के जो ५००० रुपये बचाये थे वो भी अब चले गये थे। राकेश ने कहा पिताजी आपके दोस्त को फ़ोन कीजिये में जॉब कर ने के लिये तैयार हु। जितने भी पैसे मिलेंगे में काम कर लूंगा। राकेश के पिता खुश हो गए देर से ही सही राकेश को उसकी गलती का अहसास अब हो चूका था। जब राकेश के पिता ने अपने दोस्त को फ़ोन किया तो उन्हों ने कहा की हमने आपके बेटे की जगह किसी और को हमारी कंपनी में काम के लिए रख लिया हे। अब यहाँ कोई और जगह खाली भी नहीं हे। 

                  राकेश को उसकी गलती का अहसास हो गया। उसे अब पछतावा  था की काश वो जॉब के लिये हां  कर देता। पर उसे  होने काफ़ी देर हो चुकी थी। इस कहानी  मिलती हे की भगवान भी जो मेहनत करता हे उसी का साथ देते हे उसी की मदद भी करते हे। और कोई भी काम तब तक नहीं छोड़ ना चाहिए जब तक हमें उसके बदले में दूसरा काम नहीं मिल जाये। क्युकी ऐसा हो सकता हे की अगर आप ने एक जॉब छोड़ी और काफ़ी समय तक दूसरी जॉब मिली ही नहीं। 

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