सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

bhoot ne insan ka roop liya - भूत ने इंसान का रूप लिया

        


          आज की कहानी पहले से ही मरे हुवे एक आदमी के बारे में हे उसकी आत्मा चारो और भटकती रहती थी किसी वजह से उसको मुक्ति नहीं मिल पा रही थी पर वो एक अच्छा भूत था मतलब कभी किसी को परेशान नहीं करता था। एक कार एक्सीडेंट में उसकी मोत हो जाती हे जीवन में हर बार जिसको भी उसकी जरूरत थी सब की उसने मदद की थी इसी लिए तो मरने के बाद भी लोग उसे याद करते थे मित्र हो या दुश्मन हर कोई उसकी तारीफ करते।

           दुनिया में अच्छे से जिने के लिए उसे एक शरीर की ज़रूरत थी वो मर ने के बाद भी लोगी की मदद करना चाहता था। पर उसके भी कुछ उसूल थे वो सामने वाले की मर्ज़ी के बिना उसके शरीर में नहीं जाता था वो असल में एक अच्छा भूत था। बेवजह किसी को भी परेशान नहीं करता था,अगर कोई किसी के साथ कुछ बुरा करता था तो वो भूत उसी को परेशान करता था शहर में चारो और वो भूत भटकता रहता और मन में एक ही बात सोचता रहता था की काश उसे किसी का शरीर मिल जाये ताकि वो अच्छे से लोगी की मदद कर  सके भूत के पास शक्तिया तो बहोत थी पर बिना किसी शरीर के वो उस शरीर का इस्तमाल नहीं कर सकता था। बिना शरीर के वो सिर्फ लोगो को डरा सकता था। बहोत साल बीत गये पर भूत को किसी का शरीर नहीं मिला पर उसने उम्मीद नहीं छोड़ी थी उसे विश्वास था की एक दिन किसी न किसी का शरीर उसे मिलेगा और तब वो अपनी सारी  शक्तिया का इस्तमाल कर पायेगा। 

           एक दिन कुछ लोग बैंक में चोरी करने के लिए आये और वहा भूत ने उन लोगो को बहोत डराया और वो लोग वह से भाग जाते हे।  तभी वह बैठा एक बच्चा बोलता हे कि बात हे अंकल क्या डराया हे इन लोगो को। भूत ने कहा ऐ बच्चे ! तू मुझे देख सकता हे बच्चा बोला हा में अँधा नहीं हूँ आँखे होगी तो देखूगा ही ना। तभी भूत बच्चे के पास जाता हे और उसके पास बैठता हे भूत बोलै तुम्हे मुझसे डर नहीं लगता बच्चा बोलै नहीं बस दांत काफी काले हे और बहोत गंदे हे कपडे में से भी थोड़ी बदबू आ रही हे, बच्चा बोलै तुम लास्ट टाइम कब नाहये थे। बच्चे की ऐसी बात सुनते ही भूत ज़ोर ज़ोर हस ने लगता हे। बच्चा बोला अरे !अंकल ज़रा धीरे से हसो  से डर जायेगे भूत ने कहा चलो हम दोनों घूमने जाते हे बच्चा बोलै मेरे पास पैसे नहीं हे और तुम तो भूत हो तुम्हारे पास पैसे कैसे आयेगे भूत बोला मेरे पास पैसे नहीं हे पर में उड़ सकता हु हम फ्री में जहा मर्ज़ी चाहे वहा जा सकते हे। बच्चा बोलै ठीक हे में तुम्हारे साथ चलूगा पर तुम किसी को रास्ते में तंग नहीं करोगे और रास्ते से कोई भी चीज़ खरीदोगे नहीं क्युकी हमारे पास पैसे नहीं हे भूत बोला पर मेरे पास एक प्लान हे जिस से हम पैसे कमा सकते हे बच्चा बोला क्या भूत बोलै हम रास्ते पे लोगो का मनोंरजन करेंगे यानि में तुम्हें हवा में उठाऊंगा ताकि लोग इसे जादू समझे और शायद उनको अच्छा लगेगा तो पैसे भी दे सकते हे बच्चा बोला हाँ ये हो सकता हे बाद में भूत ने बच्चे को हवा में उठा लिया और बच्चा हवा में डांस करके लोगो का मनोरंजन किया और देखते ही देखते लोगो ने उसको बहोत पैसे दिये बच्चा बोलै बस अब मुझे निचे उतार दो हमें जितने पैसो की ज़रूरत थी उससे काफी ज़्यादा मिल गये हे ज़्यादा पैसो का लोभ भी इंसान के लिये अच्छा नहीं होता। भूत बच्चे की बातें सुनकर हमेशा चौक जाता था क्युकी कोई बच्चा ऐसी बाते कर ही नहीं सकता था कभी कभी भूत को लगता था की ये कोई बच्चा नहीं हे पर साक्षात् भगवान का ही स्वरुप हे। बाद में दोनों शहर में घूम ने के लिए निकल गये।

         बच्चा भूत के साथ पूरा शहर घुमा भूत ने बच्चे के साथ बहोत बाते की और बातों बातों में भूत ने बच्चे को ये भी बता दिया की उसे अपने शक्ति का पूरा इस्तमाल करने के लिए इंसान का शरीर चाहिए ताकि वो लोगो की मदद  कर सके बच्चा बोलै में आपके साथ हु आप मेरा शरीर लेके लोगो की मदद कर सकते हो। भूत बोलै तुम तो अभी बच्चे हो तुम क्यों कर रहे हो ऐसा बच्चा बोला क्युकी तुम भूत होने के बावजूद सब की भलाई के बारे में सोच रहे हो और में तो अनाथ हु मेरा इस दुनिया में कोई नहीं हे इस लिए मेरा शरीर लेना ही आपके लिए सबसे बेहतर हे बच्चे की बात सुनकर भूत की आँखे भर आयी वो बहोत भावुक हो गया, और कहा सच में बच्चो में भगवान का रूप होता हे तुम भगवान बन कर ही मेरी मदद करने के लिए आये हो बाद में भूत ने बच्चे का शरीर ले लिया और शहर में अपनी पूरी शक्तियों के साथ लोगो की मदद करने लगा। 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

bhakt aur bhagwan ki katha -भक्त और भगवान की कथा ।

                 आज की कहानी १ भक्त और भगवान की हे मंडल नाम का एक गाँव था। वहा गोविंद और गुणी नाम के १ दम्पति रेहते थे। वो भगवान श्री कृष्णा के बहोत बड़े भक्त थे संध्या के समय हर रोज़ गोविंद नदी के तट पर जाता और भगवान का ध्यान धरता। गोविंद की पत्नि स्वभाव में बिलकुल उसके जैसा था और उनकी पत्नी का नाम गुणी था। वो अपने पति को ही भगवान मान कर उनकी हर बात मानती और भगवान की सेवा पूजा में भी अपने पति की मदद करती उनसे मिल कर ऐसा लगता जानो कृष्णा भक्त मीरा और श्री राम पत्नी सीता दोनों के ही गुण बराबर मात्रा में थे।              गोविंद कुछ भी काम धंधा नहीं करता था उसने अपना पूरा जीवन भगवान के भरोसे ही छोड़ दिया था गुणी घर में ही भगवान के लिए खिलोने बनाती और बहोत ही कम किम्मत में दुसरो को दे देती। घर में पैसे की बचत करना असंभव जैसा था। गुणी हमेशा अपने पति से कहती की भगवान हर बार तो हमारी मदद कर ने नहीं आ सकते। पर गोविंद एक ही बात बोलता जब इतने साल तक भगवान ने मुझे कोई भी कस्ट नहीं दिया हे तो आगे भी...

bimari se pata chali bhutkal ki bhole - बिमारी से पता चली भूतकाल की भूल

               आज की कहानी १ ऐसे इंसान के बारे में जिसके जीवन में हमेशा समस्या आती रहती हे पर आश्रय की बात ये हे की उसके जीवन में पैसो से जुड़ी समस्या कभी भी नहीं आयी थी ,धन सम्पति होने के बावजूद वो हमेशा दुखी रहता था।       कुण्डल नाम के गाँव में १ अजय नाम का इंसान रहता था भगवान की दया से उसके पास किसी चीज़ की कमी नहीं थी धन सम्पति के मामले में कभी उसे परेशानी नहीं आती थी पर उसकी किस्मत इतनी खराब थी की इतने पैसे होने के बावजूद वो हमेशा दुखी रहता था। कभी कभी तो खुद से ही कहता की मुझे पैसे नहीं चाहिए बस मेरी किस्मत अच्छी हो जाये। पर ऐसा कभी भी हुवा नहीं जिसके नसीब में जो होता हे वही उसे मिलता हे। अजय के नसीब में पैसे थे पर शांति नहीं थी।          अजय गाँव में सब से अमीर था ,पर वो कभी भी गाँव वालो की मदद नहीं करता गाँव में सब लोग अजय के पास पैसे की मदद मांग ने आते पर वो कभी भी उनकी मदद नहीं करता अजय को ऐसा लगता था की नसीब की तरह पैसे भी उसका साथ छोड़ देंगे तो वो क्या करेगा इस वजह से वो किसी को पैस...

bhoot ko hua pyar - भूत को हुआ प्यार

       एक बार की कहानी हे कंडल नाम के शहर में विजय नाम का एक आदमी रहता था। वो अकेला ही रहता था उसके परिवार या सगा सबंधीयो में कोई नहीं था। विजय ने कभी शादी भी नहीं की क्युकी उसे अब अकेले रह ने की ही आदत हो गयी थी। बचपन से ही उसे न माता पिता का प्यार मिला न भाई बहन का           एक दिन जब वो कुछ सब्जी लेने के लिए बहार जाता हे सब्जी लेकर घर ही जा रहा था और रास्ते में एक कार से उसको टक्कर लग जाती हे और वो बहोत दूर जाके पड़ता हे। वो सड़क पर खून से लत पत्त पड़ा रहा पर बहोत समय तक उसे कोई बचाने नहीं आया। सब लोग ने बस भीड़ जमा कर के रखी थी कोई फ़ोन में वीडियो उतार रहा था तो कोई खड़े खड़े तमाशा देख रहे थे। सब विजय को गेहर के खड़े हो गये। और तभी वहा प्रिया नाम की एक लड़की विजय को मदद करने के लिए आगे आती हे। उसने तुरंत एम्बुलेंस को फ़ोन किया। एम्बुलेंस को आयी की तुंरत ही विजय के साथ एम्बुलेंस में बैठ गयी विजय के शरीर में से काफी खून बह रहा था। इस लिए प्रिया ने अपने दुपट्टा का थोड़ा कटका फाड़ के विजय का खून रोक ने का प्रयास कर रही थी। पर विजय का...