सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

No One Can Kill Me Part -2


 No One Can Kill Me Part - 1  में आपने देखा की में 350 साल से में  एक लड़की को ढूंढ रहा हु पर अब तक उसके बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता है। समय अब मेरा बीत नहीं रहा था इस लिए मेने कॉलेज join करने का फैसला किया। और जब एक दिन में कॉलेज से घर जा रहा था तब किसी ने मेरे सिर पर वार किया और वो कोई और नहीं मेरा भाई विवेक था।  Virat Patel – Medium

          होश में आते ही मेरे भाई को देख के मेरे मन में काफी सवाल आने लगे की वो यहाँ कैसे और क्यों है। पर उन सब सवाल के जवाब मिले उससे पहले में मेरे भाई को गले लग गया क्युकी मेरे जितना प्यार उसे कोई नहीं करता था । भाई को इतने दिन के बाद देख के विवेक भी भावुक हो गया। राज ने पूछा तुमने मुझे मारा क्यों विवेक बोला आप मुझे छोड़ कर गए आपकी उस भूल के लिए। राज ने पूछा तुमने मुझे ढूंढा कैसे , विवेक ने कहा जिस तरह आप उस एक लड़की को इतने साल से ढूंढ रहे थे इसी प्रकार में भी आपको इतने साल से ढूंढ रहा था। राज को समज नहीं आ रहा था की उसे इस लड़की के बारे में कैसे पत्ता चला। राज किसी को भी उसकी आँख में देख कर कुछ भी करवा सकता था लेकिन जब कोई उसका अपना होता या उसका रिश्ता किसी के साथ खून का होता वो उनको हिप्रोटीस नहीं कर सकता था हर इंसान की कोई न कोई कमज़ोरी होती है राज की कमज़ोरी भी यही थी। विवेक भले राज से प्यार करता था पर वो उसपे भरोसा बिलकुल भी नहीं करता था बचपन से विवेक राज को धोखा दे कर उससे सब कुछ छीन लेता लेकिन फिर भी राज अपना भाई समज कर उसे हर बार माफ़ कर देता। राज को विवेक का यहाँ होने का असली मकसत जानना था, क्युकी उसे एक बात तो पता थी की विवेक सिर्फ मेरे लिए यहाँ नहीं आया है उसे कुछ और चाहिए जिसकी वजह से वो यहाँ है। 

            राज ने पूछा अब क्या plan है तुम्हारा तुम यहाँ सिर्फ बैठने को तो नहीं आये हो विवेक बोलै ठीक समजे भैया में यहाँ साथ रहने आया हु और आपकी मदद करने आया हु उस लड़की को ढूंढ ने में । राज को विवेक पे विश्वास नहीं हो रहा था, और वो मदद क्यों करना चाहता है वो भी पता नहीं चल रहा था। जब राज कॉलेज जाने के लिए निकलता था तो विवेक भी उस लड़की की तलाश में बहार जाता था। विवेक को कही से पता चला था की वो लड़की यही कही पर है बस उसे ढूंढ  ना बाकि था।  इस लिए विवेक ने अपने भाई के साथ रहने का फैसला किया। विवेक ने ये बात अपने भाई को नहीं बताई क्युकी खुद विवेक ही उस लड़की को मार ना चाहता था। 

            एक बार विवेक उसके भाई राज को मिलने के लिए कॉलेज  पोहचा और वहा वो एक लड़की को मिला जिसका नाम पूजा था।  पूजा से  हाथ मिला ने के बाद विवेक को तुरंत पता चल गया ये वही लड़की है जिसकी तलाश वो इतने साल से कर रहा था। उस लड़की को मारना उतना  भी आसान नहीं था। विवेक के पास उसे मारने के लिए सिर्फ 3 chance थे उसके बाद वो  कभी भी  उस लड़की को मार नहीं पायेगा और ये बात विवेक अच्छी तरह जानता था और वो ये भी जनता था की ये लड़की की मोत सिर्फ एक खास प्रकार के चाकू  से हो सकती है जो 150 साल पहले विवेक से गलती से खो गया था जब तक उसे वो चाकू नहीं मिल जाता वो उस लड़की को नहीं मार सकता था। इस लिए विवेक ने सोचा की में इस लड़की से दोस्ती कर लेता हु और तब तक चाकू ढूढ़ता हु जिस से बाद में उसे मारना काफी आसान होगा। 

           राज को अभी तक कुछ भी नहीं पता था। दूसरे  दिन से विवेक भी राज के साथ कॉलेज में जाने लगा विवेक को कॉलेज में देख कर राज चौक गया। और उस लड़की से दोस्ती करने का प्रयास करता रहा।  राज के सामने सब कुछ हो रहा था फिर भी वो समज नहीं पा रहा  था और कॉलेज में सिर्फ एक ही लड़की से बात क्यों करता रहता है ? और दूसरी और विवेक उस लड़की पूजा के ज़्यादा करीब आने का प्रयास करने लगा। 

To Be Continue... 

No One Can Kill Me Part - 1 


        part 3 आने तक आप मेरी दूसरी कहानियाँ भी पढ़ सकते है। निचे दी गयी कहानियाँ आपको काफी पसंद आयी थी और अगर आपने इन मे से कोई कहानी नहीं पढ़ी है तो अभी आप जा के पढ़ सकते हो।  









टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

bhoot ko hua pyar - भूत को हुआ प्यार

       एक बार की कहानी हे कंडल नाम के शहर में विजय नाम का एक आदमी रहता था। वो अकेला ही रहता था उसके परिवार या सगा सबंधीयो में कोई नहीं था। विजय ने कभी शादी भी नहीं की क्युकी उसे अब अकेले रह ने की ही आदत हो गयी थी। बचपन से ही उसे न माता पिता का प्यार मिला न भाई बहन का           एक दिन जब वो कुछ सब्जी लेने के लिए बहार जाता हे सब्जी लेकर घर ही जा रहा था और रास्ते में एक कार से उसको टक्कर लग जाती हे और वो बहोत दूर जाके पड़ता हे। वो सड़क पर खून से लत पत्त पड़ा रहा पर बहोत समय तक उसे कोई बचाने नहीं आया। सब लोग ने बस भीड़ जमा कर के रखी थी कोई फ़ोन में वीडियो उतार रहा था तो कोई खड़े खड़े तमाशा देख रहे थे। सब विजय को गेहर के खड़े हो गये। और तभी वहा प्रिया नाम की एक लड़की विजय को मदद करने के लिए आगे आती हे। उसने तुरंत एम्बुलेंस को फ़ोन किया। एम्बुलेंस को आयी की तुंरत ही विजय के साथ एम्बुलेंस में बैठ गयी विजय के शरीर में से काफी खून बह रहा था। इस लिए प्रिया ने अपने दुपट्टा का थोड़ा कटका फाड़ के विजय का खून रोक ने का प्रयास कर रही थी। पर विजय का...

Bhavishy se daro mat -भविष्य से डरो मत

        जैसे जैसे टेक्नोलॉजी में परिवर्तन आता हे वैसे ही समय के साथ इंसान के व्यवहार में भी १ चीज़ आने लगती  हे और वो हे डर आज डर किसी भी इंसान में सामन्य माना जाता हे मतलब हर कोई किसी न किसी चीज़ से डरता हे पर १ बार आप ही सोच के देखो की ये दर क्या हे और उसकी शरुवात कहा से हुवी इंसान कितना भी क़ामयाब क्यों न हो जाये पर अगर उसके अंदर किसी बात का डर छुपा हे तब कामियाब होते हुवे भी वो इंसान हमेशा दुखी होता हे।                कोई इंसान को डर रहता हे की भविष्य में उस से कोई आगे नहीं निकल जाये माता पिता को उसके संतान को कुछ हो न जाये उनकी सुरक्षा से जुड़ा डर रहता हे किसी को अपने भविष्य के बारे में चिंता होती हे आसान भाषा में बात करे तो डर कभी भी हकीकत में नहीं होता वो हमेशा भविष्य में होता हे और भविष्य तो अनिश्चित हे हमारी मृत्यु हमारी हाथ में नहीं हे हम भविष्य देख भी नहीं सकते फिर क्यों भविष्य के डर के बारे में हम वर्तमान में सोचते हे। आपको जान कर शायद हैरानगी होगी की किसी डर या चिंता को बार बार रोज़ सोच ने से इंस...

bhakt aur bhagwan ki katha -भक्त और भगवान की कथा ।

                 आज की कहानी १ भक्त और भगवान की हे मंडल नाम का एक गाँव था। वहा गोविंद और गुणी नाम के १ दम्पति रेहते थे। वो भगवान श्री कृष्णा के बहोत बड़े भक्त थे संध्या के समय हर रोज़ गोविंद नदी के तट पर जाता और भगवान का ध्यान धरता। गोविंद की पत्नि स्वभाव में बिलकुल उसके जैसा था और उनकी पत्नी का नाम गुणी था। वो अपने पति को ही भगवान मान कर उनकी हर बात मानती और भगवान की सेवा पूजा में भी अपने पति की मदद करती उनसे मिल कर ऐसा लगता जानो कृष्णा भक्त मीरा और श्री राम पत्नी सीता दोनों के ही गुण बराबर मात्रा में थे।              गोविंद कुछ भी काम धंधा नहीं करता था उसने अपना पूरा जीवन भगवान के भरोसे ही छोड़ दिया था गुणी घर में ही भगवान के लिए खिलोने बनाती और बहोत ही कम किम्मत में दुसरो को दे देती। घर में पैसे की बचत करना असंभव जैसा था। गुणी हमेशा अपने पति से कहती की भगवान हर बार तो हमारी मदद कर ने नहीं आ सकते। पर गोविंद एक ही बात बोलता जब इतने साल तक भगवान ने मुझे कोई भी कस्ट नहीं दिया हे तो आगे भी...